Śrīmad-Vālmīki-Rāmāyaṇam, Volume 5

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Srī Rāmalāla Kapūra Trasṭa Gurūbāzār
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Contents

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अत्यन्त अपने आदिकाल आप आहत इन्द्र इन्द्रजित इस प्रकार उत्तम उन उस एक एवं ऐसा और कर करके करता करने वाले कहा का कार्य कि किया की की ओर कुम्भकर्ण के द्वारा के लिए के समान के साथ को गई गये जिस जैसे जो तथा तब तु तुम ते तो था थे दिया देख देखकर दोनों धनुष नहीं नाम नामक ने पर पराक्रम पर्वत पुत्र पू पृथिवी प्रसन्न प्राप्त बलवान बाण बाणों से बीर भी भूमि में मेरे मैं यह युद्ध में युद्धकाण्ड रण में रथ रहा रहे राक्षस राक्षसों के राजा राम के रावण रावण के लक्ष्मण लगा लगे वचन वध वह वानर वानरों के वाला विभीषण विशाल वे शुद्ध सब समय सर्ग सहित सीता सुग्रीव सूर्य से युक्त सेना हनुमान हि ही हुआ हुई हुए हूँ हे है हैं हो गया होकर होता होने

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