Yajurvedātmakaṃ kāvyam: bhāṣānuvāda-sahitam

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Santarāma Śāstrī, 1996 - 122 pages
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Sanskrit verse translation and Hindi prose translation of selected mantras from Yajurveda.

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अत अथवा अध्याय अपनी अपने अर्थात आदि आप इन इस इस संसार में ईश्वर उस उस प्रभु उसके उसी एक एव एवं ओर और कर करके करता है करते हैं करने के लिए करने वाले कर्म करें का कारण काव्य कि किया किसी की के लिए के समान केवल को को प्राप्त कोई ज्ञान जाता है जीवन जो तथा तरह तू ते तेज तेरे तो द्वारा दिव्य दूर देव देवता नहीं नित्यं निरन्तर ने पर परम परमात्मा परमेश्वर पवित्र प्रकार प्रत्येक प्रभु प्रभु को पुरुष पूर्ण पृथिवी पैदा फिर बल भाव यह भी मन मनुष्य महान् मार्ग मुझे मेरे मैं यज्ञ यजुर्वेद यजू० या ये रक्षा रूप लोके वह वहीं वा वाला वाली वे वेद वैश्य शक्ति शरीर सदा सब समस्त संसार के स्वयं स्वामी सुख सूर्य से हम हमारे हि ही हुआ हुए हूँ हे है है हो होकर होते होने हों

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