Anuttara Yogī Tīrthaṅkara Mahāvīra: Ananta purusha ki jaya-yātrā

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Śrī Vīra Nirvāṇa Grantha-Prakāśana-Samiti - Jains
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अपना अपनी अपने अब अभय आज आप आया आये इस इसी उन उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसने उसी उसे एक ऐसा ओर और करता करते करने कहाँ कहीं का कि किया किसी की तरह कुछ के के लिये के साथ केवल कैसे को कोई कौन क्या क्षण गया है गयी गये गोशालक चरम जब जा जाता जाने जैसे जो ठीक तक तब तुम तुम्हारे तू तो था थी थे दिन दिया देख नहीं ने पडा पर पुरुष प्रभु फिर भगवान भी भीतर मन महावीर मात्र मुझे में में से में ही मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यह यहाँ या ये रह रहा है रही रहीं है रहे रा राजा रूप लगा लिया ले लेकिन वह वहाँ वहीं वे वैशाली सकता है सब समय सामने सारी सारे से सो स्वयम् हर ही ही नहीं हुआ हुई हुए हूँ हैं हो कर हो गया होकर होता होने

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