Samskrta avyayom ka bhashavaijnanika adhyayana

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1984 - 116 pages
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अथवा अध्ययन अन्य अब अर्थ का अर्थ में अर्थात् अर्थों अव्यय अव्ययों आदि इति इस प्रकार इसी उक्त उनके उपसर्ग उपसर्गों एक एवं कर करना करने का अर्थ का प्रयोग कार्य काल किन्तु किया गया है किसी की दृष्टि से कुछ के योग के रूप में के लिए के साथ के स्थान केवल को क्योंकि जा सकता है जैसे जो तक तथा तो था दो द्वारा धातु धातु के नहीं निपात ने पठित पद परन्तु पाणिनि पूर्व प्र० प्रति प्रत्यय होता है प्रत्ययों प्रयुक्त प्रयोग प्राय भाषा भाषाविज्ञान भी मा यथा यदि यह यहाँ या योग रधु० वा वाले विज्ञान विधान विभिन्न विशेष विशेषण विषय वे वेद शब्दों से शा० संस्कृत सकते समास सामान्य स्पष्ट स्वर ही हुआ है और है कि हैं हो जाता है होकर होती होने पर होने से

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