Jaba phūla khile patajhaṛa meṃ

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Anurāga Prakāśana, 1990 - 124 pages
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Contents

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अपना अपनी अपने अब अभी अलका अलका के आगे आज आप आपको आवाज इतना इधर इस उठी उस उसके उसे एक एकदम और कभी कर करना करने कह कहकर कहा का कि किसी की की ओर कुछ नहीं के लिए कैसे को कोई क्या घर चाय जा जी जीवन जो तक तुम तुम्हारे तुम्हें तो था थी थे दिन दिया दिल दीदी देखकर देखने दो दोनों धीरे से नरेन्द्र नहीं ने पर पूरी प्रकार फिर बस बहुत ही बात बात है बारे में बाहर बेटी बोल बोला बोले भगवान भारी भी मन मां मुझे में मेरा मेरी मेरे मैं मैंने मोहन रहा था रही रहीं रहे राजेश राधा रामू लगा लगी लगे लिया ले वह शादी शिमला सकता सकी सच सदा समय साथ साहब से से बोली स्वर हम हर हां हाथ ही हुआ हुई बोली हुए हूँ है है कि हैं हो गई होकर

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