Rājadhānī: Upanyāsa

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Amr̥ta Buka Kampanī, 1962 - 163 pages
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अच्छा अपनी अपने अब अभी आई आज आप आपको इस उसके उसको एक और कमरे में कर करके करने कल कश्मीरी कह कहकर का का परमिट काम कि किसी की कुछ के के पास के लिए को कोई कोयला कोल हाउस क्या गई गई और गये गोरा घर चपरासी चमेली चमेली ने चाय जब जमनादास ने जमनादास बोले जरा जा जाकर जाती जो झट ठीक तुम तुमने तुम्हारी तू तो था थी थे दफ्तर दिया दिया और दिये दी दे देना दो दोनों नहीं नाम ने कहा नौकर पंजाब पर परमिट प्रेमलता ने फिर बडी बहुत बात बाहर बैठ बोला बोली भी भीतर मदिरा माँ मिस गुलाब मुझे में मेरे मैं मैंने यह रख रहा रही रहे राजस्थान रात रिश्वत लगा लगी लगे लालशाह लिया ले लेकर वकील वह वहाँ सब सामने साहब सिनेमा से सौ मन कोयले हम हाथ ही हुई हुए हूँ है हैं हो गया

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