Śabda boleṅge

Front Cover
Śeṣa sāhitya prakāśana, 1990 - 72 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Common terms and phrases

अपना अपनी अपने अब अब भी अलग आकाश आज आने इन इस उत्तर उस उसकी उसे एक बार ऐसा और मैं कभी कयों करने कहीं का काश कि किया किसी की तरह कुछ के बीच के लिए को कोई कौन क्या क्यों गई गए गया है चाहती जब जा जाता है जाती हूँ जाते जीवन जैसे जो तक तब तुम तुमने तुमसे तुम्हारे तुम्हें तो था थी दिन दिया दूर दूरी दे दो दोनों धरती न जाने न जाने कब नही नहीं है निकल ने पत्थर पर पहले पाती पानी प्यार फिर बन बस बसंत बहुत बात बाद बेचैनी भय भर भी भीतर मन में माँ मुझे में मेरा मेरी मेरे मैंने यह या याद ये रह रहा है रही रहीं रहे राम लग लगता है लगती लगा ले कर लेकिन वह शब्द सच सब सा साथ सामने सीता से हम हर बार ही हुए है कि हैं होने

Bibliographic information