Laghubhāskarīyam

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Pustakaprakāśanavibhāgaḥ, Keralaviśvavidyālayaḥ, 1949 - Hindu astronomy - 146 pages
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Verse work, with commentary, on Hindu astronomy and mathematics.

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० १ १ ० १ १ १ २ १ ३ २ १ २ ३ ३ १ ३ २ ३ ३ अथेदानी इति है ईई एव औत और औरा कथन कथमिह कथमु कध्यते कर्ण का काई कि किरात कृत्वा कै को गुच्छा गुहीत्वा चन्द्रस्य चेत जीवा जो तत तत्र तथा तदा तस्माद तस्य ति तु ते तेन तो है था दस्ते दुई दुश्यते धीई नाम भवति पुन पुनरपि पुनरिह पुना पुर पूरा पूर्व पैर पैरे प्र प्रक्षिप्त प्रतिराश्य प्रि प्रित फलं बिन्दु बैर भवति है भवन्ति भी यत्फलं यत्र यथा यदि या युक्त्वा ये रई रा राई राखा रारा लभाते लिप्ता ले वराहमिहिर वा विधीयते विन्यस्य विभाज्य विशोध्य शेर्ष सति सर्व सर्वदा सा सूई स्फुट स्यात है हंई हत्या हत्वा हल्का है १ है अथ है एवं है कुत है तो है रा है है हैं होत होते

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