Kāmakuńjalatāntargata Paurūravasamanasijasūtram

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Caukhambā Saṃskr̥ta Sīrīja Āphisa, 2006 - Love - 105 pages
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Ancient treatise on art of love; Sanskrit text with Sanskrit commentary of Jayakr̥ṣṇa Dīkṣita and Hindi translation & explanation.

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अत अधिक अन्य अपनी अपने अब अर्थात् अवश्य आत्मा आदि आनन्द आनन्द का आलिङ्गन इस इसमें उत्पन्न उपदेश उर्वशी उस उस समय उसका उसके उसी उसे एक एक-दूसरे ऐसा और और पुरुष कर करते हैं करना करने का अनुभव का अर्थ काम कामदेव कामशास्त्र कामसूत्र कारण है कार्य किया है किसी कुछ के कारण के बाद के लिये के साथ कोई क्योंकि चाहिये जब जा जाता है जो तक तब तरह तो दिया दोनों द्वारा नहीं नहीं है नारी ने पर परन्तु परमानन्द पान पुरुष को प्रकृति प्राप्त फिर ब्रह्मसूत्र भी मन मनुष्य में मैथुन मोक्ष यदि यह यहाँ या ये राजर्षि पुरूरवा रूप लिङ्ग वह वाले विषय वे शब्द शिश्न सकता है सन्तुष्ट सभी सम्भोग सम्भोग में सिद्ध सुख सूत्र सूत्र में से स्तनों स्त्री की ही हुआ हुए है और है कि है तथा हैं हो जाता है हो जाती होकर होगा होता है होती होना होने

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