Jaina paramparā aura śramaṇa saṃskr̥ti

Front Cover
Sharada Publishing House, Jan 1, 2002 - Monastic and religious life (Jainism) - 322 pages
0 Reviews
Study of doctrines and monastic life in Jaina tradition.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
1
Section 2
20
Section 3
46

18 other sections not shown

Common terms and phrases

अतएव अनेक अन्य अपनी अपने अब अभाव अर्थ अर्थात् अहिंसा आदि इन इस इस प्रकार इसी उक्त उगे उत्पन्न उन उनका उनकी उनके उन्होंने उल्लेख उस उसका उसकी उसके उसी उसे एक कर करते है करना करने कर्मकाण्ड कवि कहा है का कारण किन्तु किया गया है किया है किसी की कुछ के लिये केवल को कोई क्योंकि गई गये गाथा ग्रन्थ चाहिये जता जब जा जाता है जाती जान जाने जैन जैसे जो तक तथा तब तो था थी थे दिया दृष्टि द्वारा धर्म नहीं है नाम ने पर पुराण पूर्व प्रकार प्रथम प्राचीन प्राप्त फिर बात भारत भी मत में में भी मैं यदि यब यर यह यहाँ यहीं या ये रचना रहा राजा रूप लेख वह वहीं विचार विशेष विषय वे संस्कृत समय सिद्ध सिद्धान्त से स्वयं ही हुआ हुई हुए है और है कि हैं हो होता है होती होते होने

Bibliographic information