Mehā Rāmāyaṇa

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Rājasthānī Vibhāga, Rāshṭrabhāshā Hindī Pracāra Samiti, 1984 - Religion - 81 pages
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Study, with text and commentary, of Mehā Rāmāyaṇa by Mehā, 1483-1544, medieval religious poet.

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अध्यात्म रामायण अनुसार अर आज आप आपरी आपरै आय आयो इण उण एक और कथा कर करण करी करै कवि काम कारण काल काव्य किण की कुण कृति के कैवै कै कोई कोनी खातर गांव गुजरात घणी छंद जका जकी जको जद जा सकै जाट जाय जावै जिण जुग जैन जो तद तर तरै तुलसीदास तो दसरथ दूजी देवै दो नवि नी नीं ने नै पण प्रचलित प्रभावित पाणी बात बीकानेर भावार्थ भाषा भांत भी भोज मल मंदोदरी मार्थ मेहा गोदारा मेहा रामायण मेहोजी में मैं यर रथा रं रा राज राजस्थानी राजा राम रामचंद्रजी रामायण में रामायण री रावण रावण ने री रचना रूप में रे रै रो रोम लंका लिछमण लोक विभीषण विश्नोई वै श्री सती सदी सम्प्रदाय सामाजिक साहित्य सिर सीता सीता जी सू सून हड़मान हड़मानजी हा ही हुय हुया हुर्व हुव हे है है अर हो

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