Nyāya-kusumājaliḥ

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Bhāratīya-Vidyā-Prakāśana, 1968 - Nyaya - 276 pages
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अत एव अता अथवा अदृष्ट अनुमान अन्यथा अपि तु अब अर्थात आत्मा आदि इति इति न इत्यर्थ इत्यादि इस ईश्वर उस उसके उसी एक कर कह रहे का कार्य किया किसी की की उत्पति के आधार पर के द्वारा के रूप में के लिए को कोई क्योंकि घट चार्वाक चाहिए जा सकता जाता है जाती जाय जिस जो ज्ञान तत्र तथा च तस्य तात्पर्य तु तो दिति धर्म न तु ननु नहीं हो सकता पदार्थ पर परन्तु परमेश्वर पुन पुरुष पूर्व प्रकार प्रति प्रमाण प्रवृति भी नहीं मानना मानने माना में भी यत्र यथा यदि यद्यपि यह या रहे हैं वह वहि वा विना विषय वेद शक्ति शब्द सकती सति सम्बन्ध सिद्ध से से ही स्यात् हि ही हेतु है और है कि है है हैं हो जाता हो सकता है होता है होती होने के कारण

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