Dhīḥ, Issue 37

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Durlabha Bauddha Grantha Śodha Yojanā, Kendrīya Ucca Tibbatī Śikshā Saṃsthāna, 2004 - Buddhist literature
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अत अत्यन्त अनेक अपने अर्थात् आचार्य आदि इति इत्यादि इन इस इस प्रकार इसके उत्पन्न उन उनके उन्हें उस उसके उसे एक एवं ऐसा कर करके करता है करते हुए करते हैं करना चाहिए करने कहा गया है कहा है का का निर्माण कारण किया किसी की के द्वारा के रूप में के लिए को कोई गये गुरु गुरु के चार चाहिये चैत्य जब जा जाता है जाते जान जो तक तथा तथागत तन्त्र तब तर्जनी तारा तिब्बत तीन तो था दिया देवी देशना दो दोनों द्वारा धर्म नहीं नारा ने पर पास प्रकार प्राप्त बुद्ध मन मल महायान मृ० में कहा में भी मैं यदि यम यर यल यह यहाँ या युक्त ये राजा लेक वह वाले विधि वे व्यक्ति शिष्य सं० सभी समय सारनाथ सिद्धि से स्वयं स्वरूप ही हुआ हुई है और है कि हैं हो होकर होता है होती होते होने

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