Merā vatana

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Nidhi Prakāśana, 1980 - Short stories, Hindi - 191 pages
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अपनी अपने अब अभी अमजद अहमद आई आए आगे आज आदमी आप आया आवाज आंखों इस उठा उठी उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसने उसी उसे एक ओर और और फिर कभी कर करते करने कहां क्या क्यों का कि किया किसी की की तरह कुछ कुर्ता के लिए को कोई कौन गई गए गया घर चला जब जवाब जा जाने जी जैसे जो ठीक डाक्टर तक तब तभी तुम तो थी थे दिन दिया दिल देखा दो नहीं है निशिकान्त ने कहा पडा पर पाकिस्तान पास पूछा फिर बहुत बात बार बोला बोले भी मन मुझे मुसलमान मेरा मेरे में मैं मैंने यह रहा था रही रहीं रहे थे राम लगा लगी लिया ले लेकिन लोग वह वे सकता सब साथ साहब से हम हाथ हां हिन्दू ही हुआ हुई हुए हूँ हूं है और है है हैं हो होकर होगा

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