Rītimukta kaviyoṃ kā saundaryaśāstrīya adhyayana, Volume 2

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Granthāyana, 1900 - Aesthetics in literature
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अथवा अधिक अनुभूति अपनी अपने अर्थ अलंकार आदि आलम इन कवियों इनके इलाहाबाद इस उक्त उद उदाहरण उसके एक एवं और कता कम कया कर करता है करते करने कल्पना कवि ने कविता कविता में कवियों की कवियों ने कविवर कहा का का प्रयोग काव्य में किन्तु किया है किसी की दृष्टि से की है कृष्ण के कारण के प्रति के रूप में के लिए के सौन्दर्य को गया है गुण घनानंद चित्रण छन्द जा जो ठाकुर तथा तो द्वारा नहीं है नायिका नारी पर प्र प्रकार प्रकृति प्रतीक प्रभाव प्रस्तुत प्रिय प्रेम पु पृ पृ० बिम्ब बोधा भाव भाषा भी मन यह यहाँ ये रसखान रीतिमुक्त कवियों वर्णन वह वही व्यंजना विशेष वे शब्द श्रीकृष्ण सहज सं स्पष्ट साथ सो सौन्दर्य के हिन्दी हिन्दी साहित्य ही हुआ है हुई हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होने

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