Śrīharibhaktitattvasārasaṅgrahaḥ

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Śrīgadādharagaurahari Presa, 1980 - Bhakti - 233 pages
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Selected verses on devotion (bhakti) from the Bhāgavatapurāṇa representing Chaitanya school in Vaishnavism.

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अतएव अपने आत्मा आप आपके आसक्ति इस प्रकार इसका ईश्वर उक्त उद्धव उस उसको उससे एकमात्र एव एवं और कथा कथित कर करता है करते हैं कर्म करे करें कहते कहे क्या का कारण कि किन्तु की कृष्ण के प्रति के लिए केवल कैसे को को छोड़कर ग्रहण चरण जन जाता है जिस प्रकार जो तथा च तव ते तो थे द्वारा धर्म नहीं करते नहीं है नहीं होता है नाम नारद ने पर परभी परम प्रदान प्रभूति प्राप्त प्रिय पुन भक्त भक्ति भगवत् भगवद भगवान भजन भा भी भी नहीं मुक्ति मेरा में में वर्णित मैं यथा यदि यह ये रहते हैं रा वसुदेव वह व्यक्ति वा विषय वेद शरण शरीर श्रवण श्रीकृष्ण श्रीहरि श्रीहरि के शि समस्त समान सं संवाद में संसार साथ से हि ही हूँ हृदय हे है न होकर होगा होता है होती होते हैं होनेपर

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