Śamaśera: kavitāloka

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Rādhākr̥shṇa, 1982 - 171 pages
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अज्ञेय अपनी अपने अब अर्थ आत्मा इन इस इसलिए इसी उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसी उसे ऐसी ऐसे कर करता है करती करते करने कवि कवि की कविता के कविता में कविताएँ कविताओं का का यह कालिदास काव्य किया है किसी की तरह कुछ के अनुसार के लिए के साथ को कोई क्योंकि गयी गये चीन चुका चेतना जाती जाने जीवन जैसे जो तक तुक तो था थी थे दरिया दिया दो दोनों नयी नही नहीं है निराला ने पर परन्तु पहले पृ पृ० प्रतीक प्रयोग बन बहुत बात बिम्ब भी भी है मानव मे में भी मैं यह या यानी ये रहा है रही रहे हैं रा राम रूप लय वह वही वाले वे शक्ति शब्द शमशेर शमशेर की शिव संकेत सकती सीता सूर्य से स्वर हिन्दी हिमालय ही हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं होकर होगा होता है होती

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