Candana-vana

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Yaśa Pablikeśansa, 2005 - Hindi poetry - 445 pages
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Contents

सतत सुमत अभियान चाहिए 123 सन्धिपत्र
86
जीवन लिखता रहा कहानी नमन तुम्हें से ईशे परम
94
जीवन की अनगिनत कथाएँ
157
Copyright

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Common terms and phrases

अता अनेकों अपना अपनी अपने अब आज इक इस उर उस एक और कब कभी कर कह कहीं क्यों क्रिया क्षितिज का कि किसी की कुछ के कैसे को कोई गई गए गगन गया गीत जग जन जब जा जाए जाते जिन्दगी जीवन जैसे जो तक तुम तुम्हारी तो था थे दिन दिया दुख दूर दे दो धरती नभ नयन नव नहीं है निज ने पति पर पल प्यार प्यार का प्राण पापा पाया पास फिर बया बल भर भावना भी भूल मत मधुर मन की मन में मान मानव मिल मिला मीत मीन मुझको मुझे मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यदि यया यर यल यह यहि यही यहीं ये रविवार रहा रही रहीं रहे राह रोम लिए ले वन वह वि विश्व विष्णु सका सत्य सदा सब सभी समय स्वयं स्वर साज साथ साधना से सोमवार हदय हम हर ही हुआ हुई हुए हूँ हैं हो होती

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