Mahuā-āma ke jaṅgala

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Rājeśa Prakāśana, 1984 - Short stories, Hindi - 176 pages
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अपना अपनी अपने अफसर अब आगे आज आदमी आया इस उस उसका उसकी उसके उसने उससे उसी उसे एक कभी कर करने कहा कहाँ का कि किया किसी की ओर की तरह कुछ के के लिए के साथ के सामने को कोई कौन क्या खून खेत गई गया था गयी गये गाँव घर घोटुल चला जब जयंती जा जाता जाती जिन्दगी जैसे जो तक तब तुझे तू तो थी थे दिन दिया दी दुलारी दे देख देखा दो दोनों न जाने नहीं नीचे ने पर पानी पास पीछे प्यार फिर बात बाद बाहर बोला भर भी मन मुझे में मेरी मेरे मैं मैंने मोटियारी यह यहाँ रहा था रही रहीं थी रहे रात रे लगा लगी लगे लड़की लिया ली ले वह वहाँ वे शराब सकता सब सरकार सारा सारे सिर से हम हर हाँ हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और हैं हो गया होगा होता

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