Bhāratīyatā aura Hindī-kavitā, 1960 ke bāda

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Vibhūti Prakāśana, 1987 - Hindi poetry - 230 pages
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Contents

आके
22
साठ के बाद की कविताओं
45
में भारतीय समाज और
75

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Common terms and phrases

अज्ञेय अधिक अपनी अपने आज आदमी आदि इन इनकी इस इस तरह इसलिए इसी उनकी उनके उस उसकी उसके उसे एक ओर कर करता है करती करते हैं करने कवि कविता के कविता में कविताएँ कविताओं में कवियों का किया है किसी की कविता की कविताओं में की तरह कुछ के प्रति के बाद के बीच के लिए के साथ केदारनाथ को कोई क्योंकि गया है गयी चेतना जब जा सकता है जाता है जातीय जीवन जैसे जो तक तथा तरह तो था थी थे दर्शन दशक दिया दुनिया दृष्टि देश नयी कविता नरेश मेहता नहीं नहीं है ने पर परिवेश पृ पृ० प्रकृति बात भारत भारतीय भारतीयता भी मनुष्य मुक्तिबोध मैं यदि यह यहाँ या रहा है रहीं रहे राजनीतिक वह वाले वे व्यक्ति व्यवस्था संस्कृति समय समाज सांस्कृतिक सामाजिक साहित्य से हम ही हुई हूँ है और है कि है है हैं हो होता है होती होने

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