Vaiśālī ke Licchavi

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Āśā prakāśana, 1969 - Licchavis (Asian people) - 45 pages
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अजातशत्रु अत अपनी अपने इन इस इसी उनके उल्लेख उस समय उसका उसके उसी उसे एवं ऐसी और कर करके करते थे कहा क्षत्रिय का का नाम किन्तु किया था किसी की कुछ के अनुसार के प्रति के लिए के सम्बन्ध में के साथ को कोई कौटिल्य गई गया है गये गंगा ग्रहण चलता है कि जब ज्ञात जाता था जैन जो तथा तब तरह तो था और था है थी थे और द्वारा दिया दो दोनों नगर नगरी नहीं नामक ने पर प्रकार प्राप्त फाहियान बात बिहार बुद्ध बुद्ध ने भगवान भगवान् बुद्ध भाग भारत मगध महाभारत महावीर मिलता है में भी मैं यह या ये राज्य राजा रामायण रूप में लि-छवि लिच्छवियों के वर्णन वह वहाँ विदेह वे वैशाली के वैशाली में शब्द सभी संघ स्थान से हम हमें ही हुई हुए है कि है है हैं हो होकर होता था होता है कि होती होते होने

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