Ādhunika kaviyoṃ kī dārśanika prashṭhabhūmi

Front Cover
Vidyā Sāhitya Saṃsthāna, 1993 - Hindi poetry - 256 pages
0 Reviews
Philosophy in the poetry of 20th century Hindi poets.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
3
Section 2
4
Section 3
6

12 other sections not shown

Common terms and phrases

अनेक अपनी अपने अब आज आत्मा आदि इस इसी ईश्वर उद्धव उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसकी उसके उसी उसे एक एवं ऐसा कर करता है करती करते हैं करने कवि कविता कहते कहा क्या का काव्य में किया है किसी की कुछ कृष्ण के कारण के प्रति के लिये को कोई गया है जगत जब जा जाता है जिस जी ने जीव जीवन जीवात्मा तक तथा तब तरह तुम तो था थे दर्शन दिया दो नहीं है नियति निराला ने पर परन्तु परमात्मा प्रकार प्रसाद फिर बहा बात भाव भी मन मनुष्य महादेवी वर्मा मानव मानवता माया मैं यह यहाँ यहीं या रत्नाकर रहा है रहे राम राष्ट्र रूप में वह वहा वहीं विश्व वे शक्ति शिव सकता सत्य सब सभी समाज संसार साथ साहित्य सुख सृष्टि से हम ही हुआ हूँ है और है कि है है हैं हो होकर होगा होता है होती होने

Bibliographic information