Amara javāna: kāvya saṅgraha

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Dīpaśikhā Prakāśana, 1991 - Hindi poetry - 64 pages
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अपनी अपने अब अभियान गीत अमर जवान आ गया है इन इनके इस उस एक ऐसा और कर करते हैं कश्मीर का काव्य कि किया की कसम की रक्षा के प्रति को कोटि खातिर गणतंत्र गणतंत्र दिवस चल जग जब जय जवानों जाना जो तक तथा तब तुम्हें तू तेरी तो था थी दिया दिल्ली दिवस दिवाली देना देश के दो धन्य धुन नई नई दिल्ली नमन नहीं ने पर पाकिस्तान पावन प्र प्राण फिर बन बीर बैरी बोल भारत के भारत माँ भी मां मातृ भूमि मार मैं यम यह युध्द भूमि में ये रण में रहा है रहे रहेगा राष्ट्र लगा लद्दाख लाहौर वक्त आ गया वह विजय वीर वीरों शत शत्रु शस्त्र शहीद शहीदों शिमला शैतान शौर्य श्री संग संग्रह सदा सब सम्मान सिंह सीमा से सैनिक सैनिकों के हम हमारी हमारे हमें हर हिन्द हिन्द के ही हे है है हो होता है

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