Kāvyaśāstravimarśaḥ: Saṃskr̥ta, Volume 2

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Mayaṅka Prakāśana, 1999 - Sanskrit poetry - 642 pages
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अग्निपुराण अत अध्याय अधिक अन्य अनेक अपने अभिनवगुप्त अर्थ आचार्य आत्मा आदि इन इनके इस इस प्रकार इसका इसके इसमें उदाहरण उनका उनके उन्होंने उपमा उल्लेख एक औचित्य और कथन कर करके करते करना करने कवि कहा का का नाम का समय कालिदास काव्य के काव्य में किया गया है किया था किया है की थी की रचना कुछ कुन्तक के रूप में के लिये को गई गम्य ग्रंथ चाहिये जाता है जो टीका तथा ति तीन तो थे दई द्वारा दिया दो नहीं है निम्न ने पद पर परन्तु पहले प्रकार प्रकार के प्राचीन प्राप्त बहुत भरत भामह भाव भी भेद मत मम्मट माना यह या ये रस रसों रूप से लक्षण लिखा लिखी वर्णन वामन विश्वनाथ विषय वे शब्द सभी स्वनि साथ से ही हुआ हेमचन्द्र है और है कि है तो है है हैं हो होता है होती होने

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