Kavitā kī vaicārika bhūmikā

Front Cover
Indraprastha Prakāśana, 1978 - Hindi poetry - 120 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

7 other sections not shown

Common terms and phrases

अनुभव अपनी अपने अभिव्यक्ति अर्थ आज इस कविता इसके इससे उनकी उस उसका उसकी उसके उसे एक ओर और विचार कर करते करना करने कवि के कविता के कविता में कविता-संग्रह कविताओं में कहीं का किया किसी की कविता कुछ के प्रति के रूप में के लिए को कोई क्या गया है गयी चेतना जब जरूरी जहां जा सकता है जाता है जाती जाने तक तथा तनाव तरह तो था दिया दृष्टि देता देती है देने द्वारा नहीं है ने पर परिवर्तन पहचान प्रकृति प्रक्रिया बन बात बिम्ब भी में भी में से मैं यथार्थ यह यहां या ये रचनात्मक रहा रोमानी लंबी लम्बी कविता वह वाली वास्तविकता विचार विद्रोह विधान वे वैचारिक व्यक्त व्यवस्था संघर्ष संदर्भ में संभव संयोजन सकता है सकती समकालीन साथ सामाजिक से स्थिति स्थिति के ही हुआ है हुई हुए है और है कि है जो है है हैं होकर होता है होती होने

Bibliographic information