Sāhityadarpaṇakośa

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Vidyānidhi Prakāśana, 1996 - Visvanatha Kaviraja - 226 pages
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Concordance of Sāhityadarpaṇa of Viśvanātha Kavirāja, work on Sanskrit poetics.

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अत अथवा अनेक अन्य अपने अर्थ के अर्थात् अलम आदि आरि इन इस पद्य में इस प्रकार इसका उदाहरण इसके इसमें उक्ति उगे उत्पन्न उपमान उसका उसके उसे और कथन कर करके करता करते करना करने कहते कहते है कहा जाता है का एक अब का प्रयोग काव्य किमी किया गया है किसी की के द्वारा के रूप में के लिए के साथ केवल को गुण जहाँ जा जाता है जाते जाना जाने जाये तीन तु तो दुर्योधन दो दोनों दोष नहीं है नहीं होता नामक नायक नायिका ने पद पर पुन प्रकार का प्रतीति भाव भी भीम भेद मुख यथा यदि यम यर यल यश यह यहाँ या ये रस रा राजा राम लक्षणा वल वस्तु वह विशेष विषय शब्द श्लेष से स्थिति ही हुआ हुए है कि है तथा है परन्तु हैं हो होकर होता है होती होते होना होने के कारण होने पर

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