Saṃskr̥ta nādntakoṃ meṃ nāṭya nirdeśa

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Je. Pī. Pabliśiṅga Hāusa, 1997 - Literary Criticism - 311 pages
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Study of Sanskrit drama.

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अंक 3 मृ० अंक में अत अधिक अध्याय अन्य अपनी अपने अभिनय अभिनय द्वारा अलग-अलग आदि इति इन इस इस प्रकार इसके इसी उगे उनके उसके एक एवं कई कथन कथनों कर करके करता करते है करने के कहीं का प्रयोग कारण किया गया है किये की कुछ के लिए केवल को क्रियाओं खुलना जा जाता है जाते जाना जाने जैसे तक तत तथा तो दिखाई दिया दृश्य दृष्टि देता देने द्वारा नहीं नाटक नाटककारों नाटकों के नाटयति निदेश निदेशों निदेशों के ने पत्र पत्रों के पदों परन्तु पृ प्रकार के प्रविशति प्रवेश प्रसंग प्रसंगों में फिर भाव भी मंच पर मृ० में भी मैं यम यर यह यहाँ यही या ये रत्नावली रथ रा राजा राम रावण रूप में लक्ष्मण वर्णन वल वह विभिन्न विशेष शकुन्तला संभाषण सकता साथ से स्थिति ही हुआ है और है कि हैं हो होता है होती होते होने

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