Saṃracanāvāda, uttara-saṃracanāvāda, evaṃ prācya kāvyaśāstra

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Sāhitya Akādemī, 2000 - Poetry - 451 pages
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On structuralism, literary analysis with special reference to Arabic, Persian, Sanskrit, and Urdu poetry.

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Contents

संरचनावाद
25
रूसी रूपवाद
64
कथशाहित्य का काव्यशास्त्र एवं संरचनावाद
84
Copyright

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Common terms and phrases

अथवा अधिक अपनी अपने अपितु अर्थ के अर्थात् अस्तित्व इतिहास इन इस इसलिए उत्पन्न उन उनके उर्दू उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक एवं कर करता है करती करते हैं करना करने कहता कहा का काव्य काव्यशास्त्र किन्तु किसी की की अवधारणा के अनुसार के रूप में के लिए केवल को कोई गई जब जा सकता है जाए जाता है जाती जिस जो तक तथा तीर तो था दर्शन दिया दूसरे देता है देरीदा दोनों नई नहीं है ने पर परंपरा प्रकार प्रत्येक पाठ पाठक बल बहस बात भाषा भाषा के भी मात्र यदि यया यल यह यह है यहीं या यानी ये रखता रहा रूप से लय व्यक्ति विचार विष्णु वे वैचारिकी शब्द शब्दों संकेत संरचना संरचनावाद स्थापित स्पष्ट स्वयं सामाजिक साहित्य साहित्यिक सिख सिद्धांत हम ही हुआ हुए हेतु है और है कि है की है वि है विना हैं हो होता है होती होते हैं होने

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