Śrīmadbhāgavata meṃ Śrīkr̥shṇalīlā kī prabandha yojanā: eka adhyayana

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Bī. Khaṇḍelavāla Meṭala Kāraporeśana, 1989 - Puranas - 408 pages
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अथवा अध्याय अपनी अपने अर्थ अर्थात् अवतार आदि इन इस इस प्रकार उनकी उनके उस उसके उसे एक एवं कर करके करते हैं करने कहते कहा का कारण किया किया है किसी की कुछ कृष्ण के को गया है गयी गये जब जा जाता है जाती जो तक तत्व तथा तब तो था थे द्वारा दिया दो नहीं नहीं है नाम नित्य पर परम परीक्षित प्रकट प्रति प्रथम प्राकृत प्राप्त प्रेम पुराण ब्रह्मा भक्ति भगवत भगवान भागवत भाव भी में मैं यह या ये रस रूप रूपमें रूपसे लिए लिये लीला वर्णन वह वही वाराणसी विष्णु वे श्री श्रीकृष्ण श्रीकृष्णकी सभी समय सम्पूर्ण स्थित स्वयं स्वरूप साथ सृष्टि से ही ही है हुआ है हुई हुये है ४ है और है कि है है हो होकर होता है होती होते

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