Mohana Rākeśa aura unake nāṭaka, eka adhunātana viśleshaṇa

Front Cover
Amana Prakāśana, 1995 - 207 pages
0 Reviews
Study of the dramatic works of Mohana Rākeśa, 1925-1972, Hindi author.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
1
Section 2
2
Section 3
5

3 other sections not shown

Common terms and phrases

अन्य अनेक अपनी अपने अब आदमी आदि आधुनिक आषाढ़ इन इस इस प्रकार इसी उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसे एवं कमलेश्वर कर करते करने का का एक कारण कालिदास किन्तु किया है किसी की कुछ के लिए के साथ को कोई गई गया है घर जा जाता है जाती जाने जिन्दगी जीवन की जैसे तक तथा तरह तो था थी थे दिया दृष्टि से दो दोनों नहीं नहीं है नाटक नाटककार नाटकों ने पर पहले प्रकाशित प्रति प्रयोग पात्रों पुरुष पृ० पृष्ट फिर बडी बन बम्बई बहुत बात भी मन माँ में में राकेश में ही मैं मोहन राकेश यह यहाँ या रहा है रहे रंगमंच राकेश के लगता है लिखते लेकर वह वही व्यक्ति वाले वे सकता है सब समय संस्कृत स्वयं साहित्य से हिन्दी ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है जो है है हैं हो होता है होती होने

Bibliographic information