Baṇdhavihānaṃ; 'Premaprabhā'ṭīkā-samalaṅkr̥ta.Mūlagāthākārāḥ Munaśrīvīraśekharavijayāḥ.Ṭīkākāraḥ Muni Jagacbandra Vijaya, Volume 1, Part 2

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Bhāratīya-Prācyatttva-Prakāśana-Samiti, 1966 - Philosophy
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अत अति अथ अनेके अप अब अम अव अवर आह आहार इत्यादि इति इन्याहि इश-याहि एक एब एव एवं और क्या का काय काल कि की के को खलु गीति चेति चेर ज्ञातव्य जा जीव जीवा णियमा तत्र तथा तदा तब तह तहा ता ताल तीनों तु ते च तेन तेल तो था धका नव नि नियमन निरन्तर नैव पर प्रकृति प्रकृतीनां प्राप्पते प्राय प्रे० पावर पुन बजते बध्यते बध्यमानत्वाद बध्याति बधिर बन्धक बन्धकानां बल बलि बंधक भवति भवे भागा भागे भागो भावना भी मलय मार्ग में मैं यतो यदा यम यया यर यल यश यह यहि रा लि लियम वर्तनी वर्तमान वा वि विद्यते विशेष वेद सति सन्ति सब सबसे सम समय समयों सह संगति स्वाद सा साय सार्क से सेसल सेसा हि है है है हैव हैं होते

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