Āyurvedīya padārtha-vij˝āna

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Jagadambā Āyurvadika Rīsarca Sentara : prāpti sthāna, Jagadambā Āyurveda Bhavana, 1974 - Hindu philosophy - 372 pages
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On the philosophical bases of the ayurvedic system of medicine.

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अत अता अनुमान अन्य अपने अभाव अर्थ आचार्य चरक आत्मा आदि आयुर्वेद इन इस प्रकार इसके इसी उत्पन्न उन उस उसके उसे एक एवं कर करता है करते करने कर्म कहते हैं कहा का का ज्ञान कार्य काल किया है किसी की की उत्पति के के द्वारा केवल को कोई क्योंकि गया है गुण गुणों ग्रहण जब जल जा जाती जिस जैसे जो तथा तब तमोगुण तीनों तो दर्शन दो दोनों द्रव्य नहीं है नहीं होता पदार्थ पर परन्तु पुरुष पृथ्वी प्रकार के प्रकृति प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त भाव भी भेद मन माना में यह या ये रजोगुण रहता है रहते रूप में लक्षण वस्तु वह वायु वाले विशेष विषय विषयों वे वैशेषिक शब्द शरीर संयोग संसार सकता सभी सांख्य साथ सामान्य सिद्धान्त सिद्धि सुश्रुत ही हुआ हुए हेतु है और है कि है है हो जाता है होकर होता है होती होते हैं होने से

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