Sāhitya-manīshā: Ḍ. Omprakāśa Śāstrī smr̥ti grantha

Front Cover
Ārya Buka Ḍipo, 1985 - Critics - 248 pages
0 Reviews
Commemorative volume on the life and works of Omprakāśa Śarmā, Hindi critic and author; includes contributed articles on Hindi literature.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

शोधपरिधि
107
काव्य बिम्ब व अलकायोग डॉ० शिवप्रसाद भारद्वाज
144
रामचरितमानस में सांस्कृतिक वैभव डॉ० रमानाथ त्रिपाठी
193

1 other sections not shown

Common terms and phrases

अथवा अधिक अनेक अन्य अपना अपनी अपने आज आदि इन इस इसी उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस एक एवं ओर और कभी कर करते करना करने कवि कहा का काव्य किया किया है किसी की कुछ के कारण के लिए के साथ को कोई क्या गई गए गया है घर चाहिए जब जाता है जाने जी जीवन जैसे जो डॉ० तक तथा तो था थी थे दिन दिया दिल्ली दृष्टि दो दोनों द्वारा नहीं नाटक ने पंजाब पर पास प्रकार प्रति प्रयोग प्रस्तुत फारसी फिर बहुत बात बाद बार भारत भारतीय भाषा भी मुझे में में ही मेरे मैं मैंने यह या ये रचना रस रहे राम रूप में वह वाले वे व्यक्ति शक्ति शब्द श्री संस्कृत सकता है सब सभी समय सम्बन्ध साहित्य सिंह से हम हमारे हिन्दी ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं हो होता है होती होते होने

Bibliographic information