Svatantryottara mahilā upanyāsakāroṃ ke upanyāsoṃ meṃ yathārtha ke vibhinna rūpa

Front Cover
Pacaśīla Prakāśana, 1996 - Hindi fiction - 230 pages
0 Reviews
Realism in the works of post-1947 Hindi women novelists; a study.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
1
Section 2
43
Section 3
130
Copyright

3 other sections not shown

Common terms and phrases

अधिक अपना अपनी अपने अब आज आदर्श आदि आधुनिक इन इस इस उपन्यास उगे उनकी उनके उन्होंने उपन्यास उपन्यासकारों उपन्यासों में उस उसका उसकी उसके उसे एक एवं कर करता है करती करते करना करने कहती का किया है किसी की कुछ के कारण के लिये के साथ केवल को कोई गया है चाहती चाहिये चित्रण चौवन जब जा जाता है जाती जीवन की जैसे तक तथा तरह तो था थी दिया दृष्टि दृष्टिकोण देता देती है दोनों द्वारा नये नहीं है नायिका नारी पति पर परन्तु परिवार परिवेश पुरुष पृष्ट प्रकार प्रस्तुत प्रेमचन्द भारत भी मन महिला मिजो में भी यथार्थ यदि यर यल यह यहाँ या रही रा रूप में लेकर लेकिन लेखन लेखिका ने लेखिकाओं ने वह विवाह वे व्यक्ति शिवानी सकता समाज सामाजिक साहित्य से स्थिति स्थितियों हिन्दी ही हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होने

Bibliographic information