Gauṛīya Vedānta

Front Cover
Durgā Pablikeśansa, 2008 - Philosophy - 138 pages
0 Reviews
Exhaustive study of the philosophy of Vedanta as interpreted in the works of Vaishnava leaders of Chaitanya Sect in Vaishnavism.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Common terms and phrases

अथवा अन्य अपनी अपने अस्तित्व आचार्य आदि इन इनके इस इस प्रकार इसका इसकी इसके ईश्वर के उनकी उनके उपासना उसकी उसके एक एवं एवम् और करके करता है करती करते हैं करना करने कहा का कार्य किया की की तरह कृष्ण के कारण के रूप में के लिए के साथ के स्वरूप को को भी क्रिया गया है गुणों गोडीय गोस्वामी चैतन्य मत जगत् जाता है जाना जीव जीवात्मा जो ज्ञान तक तथा तो था दर्शन दार्शनिक दृष्टि में दो दोनों द्वारा नहीं ने पर परमात्मा पृ प्रकार के प्रभृति प्राप्त बलदेव बात ब्रहा ब्रहा के ब्रह्म भक्ति भगवान् भाव भी माधुर्य माना मान्यता मे में भी मोक्ष यह यहाँ यहीं ये रहता है रहा राधा रूप से वह विद्याभूषण विशेष विष्णु वेद वेदान्त वेदान्त के वैष्णव शक्ति शाङ्कर श्रीकृष्ण श्रुति सत्य सम्बन्ध सिद्ध से स्वीकार ही हुआ है हुई हेतु है कि हैं हो होता है होती

Bibliographic information