Machalī marī huī

Front Cover
Rājakamala Prakāśana, 1966 - 163 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Related books

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Copyright

6 other sections not shown

Common terms and phrases

अपनी अपने अब आई आदमी आया इस उसकी उसके उसने उसे एक ओर औरत कभी कयों कर करता करती करते करने कराची कलकत्ता कल्याणी कहा क्या का किया किसी की तरह कुछ कुर्ती के पास के बाद के लिए के साथ को कोई खडी गई है गया है चली चाहता चाहती है चाहिए जा जाता है जाती जैसे जो डॉक्टर रघुवंश तक तुम तो था थी थे दिन दिया देखा दो दोनों नहीं है नियोगी निर्मल को निर्मल ने निर्मल पदूमावत नीचे पर पहले प्यार प्रिया फिर बडी बन बहुत बात बार बाहर भी नहीं मगर मर माँ मिल मुझे मेरे मेहता में मैं मैंने यह या रहा है रही रहीं रहे रात लगा लगी लड़की लिया लेकिन लोग वह वे शराब शहर शीरीं शीश सकती सामने साल साहब सिर से हर हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ है और है है हैं हो गई हो गया होती

Bibliographic information