Padamavata aura Kanhavata ki bhasha, eka tuanatmaka adhyayana

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1993 - 341 pages
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अथवा अधिक अन्य अवधी आदि इन दोनों इलाहाबाद इस प्रकार के इसके अतिरिक्त ई० उपर्युक्त उपलब्ध होता है उपलब्ध होते उल्लेख एक एकवचन ऐसे क० कंस कर करने कवि कवि ने कहा का प्रयोग काव्य की की दृष्टि से की भाषा कुछ के अन्तर्गत के योग से के लिए के साथ केवल को कोई क्रं० क्रिया गया है जा सकता है जायसी जिया जो तथा कन्हावत तया तो दोनों ही कृतियों द्वारा प० पदमावत कन्हावत पर प्रत्यय प्रत्ययों प्रयोगों प्रस्तुत बहुवचन भाषा के भिन्न भी में इस में उपलब्ध में प्रयुक्त में प्राप्त यथा यह योग रचना रचनाओं री रुप रूप में रूपों के लिया वाले विशेषण विष्णु शब्द शब्दावली शब्दों के सं० सन् सब समान रूप से सम्बन्ध सो ही कृतियों में हुआ है हुई हुए है और है कि हो होइ होती होते हैं होने

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