Paribhāṣenduśekharaḥ: Yāgeśvarśāstri-vircitayā Haimavatītīkayā saṃvalitaḥ

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Sampurṇānanda-saṃskrita-viśvavidyalayeḥ, 1975 - Foreign Language Study - 369 pages
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१ ० अत आह अत्र अधि अस्य इच्छा इति सूने इति है इत्यत्र इत्यनेन इत्यर्थ इत्यस्य इत्यादी इत्येव इयं इराक है ईई एतेन एव है एवं एवेति है और का कार्य कि किन्तु कृते के ग्रहण चरा चेत चेत है चेति जा जो तत ततो तथापि तदर्थ तदा तस्य तु न तुक था दि दिक दिति न तु न दोष न स्यादिति न है नेति न्यायेन पराय परिभाषा परे पाठा पूर्व पैरे प्रति प्रत्यय बाधित्वा बोध्यार है भक्ति भर्ष भला भवति है भाव भावा भाषा है भाहये भी माक है मिति यत्र यथा यस्य या यो रा रार लोके लोप वस्तुत वा विस्तर सति सर्वत्र सह सा सिते स्थाने स्पष्टमेव है स्वाद है अत एव है अन्यथा है एवज है तत्र है तत्र हि है तथा च है तेन है न च है ननु है है हैं होते

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