Bihārī aura unakī Satasaī: samīkshā, mūlapāṭha, tathā vyākhyā

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Kitāba Ghara, 1969 - Poetry - 370 pages
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Study of Bihari Lal, 17th cent. Hindi poet, and his work 'Bihāri Satasaī'; includes the original text with paraphrase and notes.

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Common terms and phrases

अत अथवा अधिक अनुप्रास अपनी अपने अब अर्थ अर्थात अलंकार आदि इन इस इस प्रकार इसी उनकी उनके उस उसका उसकी उसके उसे एक एवं ओर कर करता करती करते हुए करने कवि कवियों कहता कहती है कि का वर्णन काल काव्य किन्तु किया है किसी की कुछ कृष्ण के कारण के लिए को क्योंकि गई चित्रण जा जाता है जाती जाने जो तथा तुलनात्मक तू तो था थी थे दिया दृष्टि देखकर दोनों नहीं नहीं है नायक नायक से नायिका के नेत्रों पर प्रिय प्रेम बात बिहारी ने भाव भी मन में में भी मेरे मैं यमक यह ये रस रहा है रही रहे रूप लाल वह विरह विशेष वे शरीर श्रीकृष्ण श्लेष सखी से सतसई साथ साहित्य सी से कहती है सौन्दर्य हिन्दी साहित्य ही हुआ हुई हृदय है और है है हैं हो होकर होता है होती होने

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