Bihārī kā nayā mūlyāṅkana

Front Cover
Hindī Pracāraka Pustakālaya, 1964 - 181 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

7 other sections not shown

Common terms and phrases

अंग अति अधिक अन्य अपनी अपने अप्रस्तुत अब अर्थ अलंकार इन इस इसके उदाहरण उनकी उनके उस उसकी उसके उसे एक कम कर करता है करते करने करि कवि कवियों कहा का का प्रयोग काव्य किया है किसी की कुछ के कारण के लिए को कोई खरी गई गया है चित्र जा सकता है जाता है जाती जाय जिस जो तथा तन तरह तो त्यों था थे दिया दूसरे देखिए दोनों दोहे में द्वारा नहीं है नायक नायिका नायिका के पर परंपरा पहले प्रकार प्रति प्रेम फिरि बहुत बात बिहारी की बिहारी ने ब्रजभाषा भाषा भी मन मान माना में में भी यह यहाँ या ये रस रहीं रूप लखि लाल वर्णन वह विशेष वे शब्द श्लेष संस्कृत सतसई सब सी से सो स्थान ही हुआ हुई हुए है और है कि है जो है तो है वह हैं हो होगा होता है होती होने

Bibliographic information