Sārasvata-sandarśanam

Front Cover
Bhāratī Pariṣad, 1973 - Philosophy, Indic - 682 pages
0 Reviews
Articles on the Vedas, Sanskrit grammar and literature, Indic philosophy, etc.

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

11०यो०थ३यण ल 1 8 10 प्र 11010111 878 114 161
1१य०ल
28
डिशल
69

1 other sections not shown

Common terms and phrases

१० अज अधिक अनेक अन्य अपनी अपने अब अभी अर्थ अहे आज आदि आर्ट इति इन इस इसी उनके ऋग्वेद एक एवं ओर और कर करते करना करने कवि कहा का काल कालिदास काव्य किन्तु किया गया किया है की कुछ के कारण के लिए के लिये केवल को क्या गई गया है गये ग्रन्थ जा जाता है जाती जाते जि जीवन जैसे जो तक तथा ता तो था थी थे दिया देश द्वारा धर्म नहीं है नाम ने पतंजलि पर पाणिनि प्र प्रकार प्रति प्रथम प्रयोग प्राचीन भारत भारतीय भाषा भी मराठी में में भी यय यह यहाँ यहीं या रहा राम ल प्र वर्णन वर्ष वह विषय वे वेद व्याकरण शब्द शब्दों संस्कृत सकता है सभी समय सिर सूत्र से स्थान हम हिन्दी ही हुआ हुए है और है कि है है है० हैं हो होता है होने

Bibliographic information