Bhāratīya darśana kosha, Volume 2

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Iṇḍiyana Yūnivarsiṭī Presa, 1973 - Philosophy, Indic
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अनुमान अनेक अन्य अपने आत्मा आदि इन इस मत के इसके इसी ईश्वर उत्पति उपनिषद उसे एक कर करता है करते करना करने कर्म कहते हैं का कार्य कि किए किया गया है किसी की अवस्था में की प्राप्ति कुछ के अन्तर्गत के आधार पर के कारण के दो के द्वारा केवल को कोई चार जगत् जब जाती जीव जो ज्ञान तत्व तथा तन्त्र तीन तो दर्शन के अनुसार दी गयी है दो दो भेद दोनों धर्म नहीं नहीं है ने पदार्थ परन्तु परमात्मा पाँच पुरुष प्रकार के प्रकृति प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त बुद्धि ब्रह्म भगवान भी मत के अनुसार माना माने गए माया में ही मोक्ष यह ये रजोगुण रहता है रूप से वह वाले वास्तविक विशेष वेद शक्ति शब्द शरीर शिव संसार सकता सभी समस्त समाधि साधक सृष्टि से से ही स्थिति स्वरूप स्वीकार ही है और है है हो जाता है होता है होती होते हैं होने पर

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