Abhij %nānaśākuntalam nāma nāṭakam

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Raj Publishers, 1962 - Sanskrit drama - 854 pages
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अनसूया अपनी अपने अब अर्थात अलंकार अलंकार है आदि आप इति इन इन्द्र इस इस प्रकार इसके इसलिये इसी उस उसकी उसके उसे एक एका एव एवं ओर कर करके करता है करती करना कह का कामदेव कार्य कालिदास किया है किसी की कुछ के लिए के लिये के सम्बन्ध में के साथ को कोई क्त क्या गया है छन्द जा जाता है जाने जिस जो तक तथा तापु तो था थी दिया दुष्यन्त दो दोनों द्वारा नहीं नहीं है नाटक नाम ने पर परन्तु पुरु प्र प्रकार प्रति प्रा प्रेम बद बहुत बात भी मन मुझे मैं यस्य यह या रहा है राजा वह वि विशेष व्याख्या शकुन्तला शकुन्तला के शब्द षा ता सब समय सा सुन्दर से स्पष्ट हि ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं हो होता है होती होने के कारण

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