Saṃskr̥ta nāṭya meṃ nāyikā

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Haṃsā Prakāśana, 1997 - Literary Criticism - 196 pages
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Depiction of women characters in Sanskrit drama; a study.

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अगला अत अता अत्यन्त अथवा अधिक अनेक अन्य अपने अब अभिनवगुप्त अर्थ अर्थात अलंकार आदि इन इस प्रकार इसका उदाहरण उनके उसके उसे एक और करके करती है करने पर करने वाली कहलाती है का लक्षण किए किसी की कुछ के अनुसार के कारण के द्वारा के प्रति के लिए को गई गए गणिका गया है जाता जाती है जो तथा था दिया धनंजय नहीं नहीं किया नहीं है नाम नामक नायक नायिका के नारी नाविक ने ने भी पति पर पर भी परत परन्तु परवर्ती पुरुष प्रकट प्रस्तुत किया है प्राप्त प्रिय प्रिय के भरत भरत ने भाव भी भेद मध्यमा महाभारत मान मिय यम यह या ये रति रत्नावली रबी रही रामायण लक्षणों वर्णन वह वाले विभिन्न विस्तृत शकुन्तला समय समस्त समान से से चुका स्पष्ट स्वयं स्वरूप हम ही ही है हुई हुए है एवं हैं हो होकर होता होती है होते होने पर

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