Abhijānaśakuntalam: Kālidāsaviracitam. Samīksātmaka bhūmikā, Saṃskr̄ta ṭīkā, Hindī anuvāda, vyākhyātmaka ṭippaṇī, tathā pariśiṣṭa sahita. Sampādaka Nirūpaṇa Vidyālṅkāra tathā Bābūrāma Pāṇḍeya

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Sāhitya Bhaṇḍāra, 1969 - Sanskrit drama - 470 pages
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अत अता अथवा अनसूया अपनी अपने अब अर्थ अर्थात् अलंकार आप इति इन्द्र इव इस इसका इसके इसप्रकार इससे उस उसका उसकी उसके एक एव ऐसा कर करके करता है करती करते करने के कहा का कार्य कालिदास किन्तु किया गया है किया है किसी की कुछ के द्वारा के लिये के समान के साथ को कोई क्या गई गये चाहिये छन्द जा जाता है जाती जाने जो तक तथा तो था दिया दुष्यन्त दो दोनों नहीं है नाटक नाम ने पद्य में पर प्रकार प्रतीत प्रस्तुत पद्य बात भी मन में मेरे मैं यदि यस्य यह यहां यहाँ पर रहा है राजा लक्षण वर्णन वह वा वाला वाली वाले विदूषक विशेष विषय में शकुन्तला के शब्द समय से ही हुआ है हुई हुये हूँ है और है कि है क्योंकि है है हैं हो होता है होती होने के कारण

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