Nyāyavārttika: Nyāyasūtra tathā Vātsyāyana bhāshya sahita, Volume 3

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Iṇḍo-Vijana - Nyaya - 1175 pages
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Gloss on Nyāyabhāsỵa of Vātsyāyana, a commentary on Nyāyasūtra of Gautama.

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अणु अत अथ अथवा अनुमान अनेक अन्य अभिप्राय अर्थ आत्मा आदि आदि के इति है इन्दिय इस इसका इसप्रकार इसलिये उत्पन्न उपलब्ध उस उसका उसके एवं ऐसा कर करता है करने कर्म कहा का का ग्रहण कारण कार्य किन्तु किया की की उत्पति के कारण के लिये के समान को कोई क्या क्योंकि गया है गुण चक्षु जा जाता है जाती जाने जैसे जो ज्ञान ठी० ठीक तथ तथा तब तु तो देखा द्रव्य धर्म नही नहीं है नहीं होता निमित्त नियम ने पृथिवी प्रकार प्रतिषेध प्रत्यक्ष प्राप्त बुद्धि भय भिन्न भी भेद मन में यथा यदि यह यहाँ युक्त ये रूप वह वाला वाले विनाश विशेष विषय शब्द शरीर शरीर की सब समाधान सम्बन्ध सिद्ध स्मृति हि ही हुआ हुए हेतु है और है कि है तो है वह है है हैं हो होगा होता है होती होते होना होने पर होने से

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