Satya ke avaśesha: Śuṅgakālīna gaveṣaṇātmaka aitihāsika upanyāsa

Front Cover
Sāhitya Pracāraka, 1971 - 314 pages
0 Reviews

From inside the book

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3

15 other sections not shown

Common terms and phrases

अग्निमित्र अपना अपनी अपने अब अभी आकर आचार्य आज आज्ञा आप इतना कह इस उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसने उसी उसे एक और कक्ष में कर रहे करते करना करने करने के कहा का कार्य कि किन्तु किया किया है किसी की ओर कुछ के बाहर के लिए के साथ केवल को कोई क्या क्षण गई गये जब जा जाने जो ज्ञात तक तुम तो था थी दी देख देखा देव देवदत्त दो दोनों द्वार धर्म नगर नहीं ने पर पश्चात् पाटलिपुत्र पास पुष्यमित्र प्राप्त फिर बौद्ध धर्म भवन भिक्षुक भी मगध महामात्य महाराज मुख मुझे में मैं यह युद्ध युवक रहा था लगा लिया ले लोहित वसुमति वह वहाँ विचार विदर्भ विहार वीरभद्र वे व्यक्ति शक्ति सकता सब समय सम्राट साम्राज्य सुभागा सूचना से सेना सेनापति स्थान हम ही हुआ हुई हुए हूँ है और है कि है है हैं हो गया होगा होता होने

Bibliographic information