Saṃskr̥ta ke paravartī ācārya

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Aksharama, 1988 - Poetics - 172 pages
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अत अथवा अनेक अन्य अपने अर्थ अलंकार आचार्यों आदि इस इस प्रकार इसका उत्पन्न उदाहरण उनका उनकी उनके उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसमें उसी प्रकार उसे एक औचित्य और कथन कर करते हुए करना करने कवि कहा जा सकता का कालिदास काव्य के किन्तु किया जाता है किया है किये किसी की है के अनुसार के लिए को गुण चमत्कार चाहिए जब जा सकता है जाता है जाती जिस प्रकार जिसका तथा तो दोष द्वारा नहीं है नाटक पद पर प्रकार के भरत मुनि भावों भी भेद महाभारत माना है में भी यदि यह रचना रति रस रस का रस की रसों लक्षण वक्रता वर्णन वस्तु वह वही वहीं वाक्य विभाव विवेचन विशेष विश्वनाथ ने विषय वे शब्द श्रृंगार सभी से सौन्दर्य स्थिति ही हुआ है कि है क्योंकि है जिसके है जिसमें है जो है तो हैं होकर होता है होती होते हैं होने होने के कारण

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