Chattīsagar̥hī gīta aū kavitā

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Chattīsagaṛha Vibhāga, Hindī Sāhitya Sammelana, 1967 - Hindi poetry - 34 pages
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Contents

बादर
संग समय के चलना परहीं
बेरा नवनिरमान के

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अइसन अऊ अन अब अस आज आँखी के इन इस उन्होंने एक और कर करिन करिस करी करे का काव्य कि आगे बेरा किया किसान कि आगे की के काजर के जागी बीर के तुहंर के सब को गंगा गीत गीतों गोदा फुलगे घर छत्तीसगढ छतीसगढ़ जगाये भाग जब जवान जागहीं जागी बीर किसान जिनगी जी जीवनी झन तो तोर था थे दिया देने देस दो धर धरती नदिया नरायन सिह नहीं ने पर प्रथम प्रसाद पांडेय फिरंगी बन गे बर बरस रे बादर बल बात बीर किसान कि बेरा नव-निर्मान के बैरी भाग जागही भारत भी भूले बिसरे मन के मा माटी मुंह में मोर यह रा राम रायपुर रुपया लहू ला ले वे सन् सब सम्मेलन स्वर साहित्य सिरतो हिन्दुस्थान सुरुज से हम हमर हरिठाकुर हिन्दी हिन्दी साहित्य हिन्दुस्थान के हिमालय ही हे है हैं हो

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