Pūrvameghaḥ

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Rāmanārāyaṇlāla Benīprasāda, 1966 - Sanskrit poetry - 237 pages
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अथवा अधिक अपनी अपने अलंकार आगे आदि इति इव इस इसका इसी उस उसके उसे एक एव एवं ऐसा और कर करके करते करना करने कवि कहते हैं का अर्थ का वर्णन का विशेषण है कालिदास काव्य किया है की के द्वारा के लिए है के समान को कोई गंगा गया है चित्रण जल जाते जाने जी जो तत्र तथा तद० तस्य ते तो था है दिया नदी नहीं नाम ने पर पाठ पार्वती प्रकार प्रतीत प्रथम प्रेम भी भीति मानते हैं मार्ग में में ही मेघ मेघदूत मेध है यक्ष यद यदि यस्य रहा है रा रावण रूप वर्णन है वह वाला वाली वाले विशेषण है है शब्द श्लोक सा सुन्दर से स्थान हिन्दी हिमालय ही ही है हुआ है हुई हुए है इस है कि है कुछ लोग है तथा है परन्तु है यह हैं होकर होगा होता है है होती होते होने से

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